
आज प्रयागराज में संतों के संत, महान समाज सुधारक और भक्ति आंदोलन के प्रेरक संत शिरोमणि रैदास जी की जयंती के पावन अवसर पर एक भव्य शोभा यात्रा का आयोजन किया गया। यह शोभा यात्रा सोहबतिया बाग से प्रारंभ होकर पूरे प्रयागराज शहर में भ्रमण करती हुई सामाजिक समरसता, समानता और मानवता का संदेश देती रही।
शोभा यात्रा के दौरान संत रैदास जी के विचारों को जन-जन तक पहुँचाया गया और उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया गया।

संत रैदास जी का संदेश
“ऐसा चाहूँ राज मैं, जहाँ मिले सबन को अन्न,
छोटा-बड़ा सब सम बसे, रैदास रहे प्रसन्न।”
यह पंक्तियाँ एक ऐसे समाज की कल्पना प्रस्तुत करती हैं जहाँ कोई भेदभाव न हो, सभी को समान अवसर और सम्मान मिले। संत रैदास जी ने अपने जीवन और वाणी के माध्यम से जाति, ऊँच-नीच और सामाजिक असमानता का विरोध किया तथा प्रेम, करुणा और भाईचारे पर आधारित समाज का सपना दिखाया।
भव्य और आकर्षक शोभा यात्रा
इस शोभा यात्रा में हाथी, घोड़े, ऊँट, रथ-बग्गियाँ तथा डीजे और गाजे-बाजे शामिल रहे। श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या ने पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ यात्रा में भाग लिया। मार्ग में जगह-जगह लोगों ने पुष्प वर्षा कर शोभा यात्रा का स्वागत किया।
सामाजिक एकता का प्रतीक
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य संत रैदास जी के विचारों को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाना और यह संदेश देना था कि समाज तभी आगे बढ़ सकता है जब सभी लोग समानता, न्याय और आपसी सम्मान के साथ रहें।
निष्कर्ष
संत शिरोमणि रैदास जी की जयंती पर निकली यह शोभा यात्रा केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और एकता का सशक्त उदाहरण रही। संत रैदास जी के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और हमें एक समतामूलक एवं मानवतावादी समाज की दिशा में प्रेरित करते हैं।