झांसी जेल में कैद एक मासूम: 1 महीने की बच्ची का क्या कसूर?

झांसी की जेल में एक ऐसी कैदी है जिसने कोई अपराध नहीं किया।
वो सिर्फ एक महीने की मासूम बच्ची है।

न उसे दुनिया का मतलब पता है,
न रिश्तों की सच्चाई…
फिर भी वो सलाखों के पीछे है।

सवाल है—उसका कसूर क्या है?


यह मामला झांसी के प्रेम नगर थाना क्षेत्र के हंसारी स्थित सारंद्रा नगर से सामने आया है।

24 वर्षीय मोनिका, जो मूल रूप से जालौन के कोंच की रहने वाली थीं, की शादी 9 जून 2025 को संदीप सविता से हुई थी। शादी में लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन आरोप है कि ससुराल पक्ष की दहेज मांगें लगातार जारी रहीं।

करीब एक महीने पहले मोनिका ने एक बेटी को जन्म दिया था। परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन यह खुशी ज्यादा समय तक नहीं टिक सकी।

घटना वाले दिन मोनिका नहाने के लिए बाथरूम गई थीं। काफी देर तक बाहर न आने पर घरवालों को शक हुआ। दरवाजा तोड़कर देखा गया तो वह दुपट्टे के सहारे लटकी हुई थीं। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

मायके पक्ष ने इस मामले को दहेज हत्या बताया है। मृतका के भाई का आरोप है कि शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष मोनिका को प्रताड़ित करता था। बुलेट मोटरसाइकिल, चेन और अन्य सामान की मांग की जा रही थी। मारपीट और मानसिक दबाव की भी बात सामने आई है।

पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर 5 अप्रैल को पति संदीप सविता और सास गायत्री देवी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

लेकिन इस कहानी का सबसे दर्दनाक पहलू यहां से शुरू होता है।

एक महीने की बच्ची की देखभाल करने वाला कोई नहीं था। ऐसे में पुलिस और प्रशासन ने उसे उसके पिता और दादी के साथ जेल में रखने का निर्णय लिया।

जेल प्रशासन के अनुसार, नियमों के तहत 6 साल से कम उम्र के बच्चे अपने माता-पिता के साथ जेल में रह सकते हैं। बच्ची के लिए दूध, कपड़े और डायपर की व्यवस्था की गई है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सब एक मासूम के लिए पर्याप्त है?

जिस उम्र में एक बच्चे को मां की गोद, प्यार और सुरक्षा की जरूरत होती है, उसी उम्र में वह जेल की दीवारों के बीच अपना बचपन शुरू कर रही है।

यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि समाज और सिस्टम दोनों पर सवाल खड़ा करती है।

क्या उस बच्ची का कोई कसूर है?
या वह सिर्फ परिस्थितियों की शिकार है?

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