
लखनऊ, उत्तर प्रदेश (ग्राउंड ज़ीरो): ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आते ही राजधानी लखनऊ में शिया समुदाय के लोगों का गुस्सा और दुख सड़कों पर साफ दिखाई दिया। रविवार को ऐतिहासिक छोटा इमामबाड़ा से हजारों की संख्या में लोग पैदल मार्च करते हुए निकले। पूरे इलाके में गम और आक्रोश का माहौल था।
मार्च में शामिल लोग हाथों में खामेनेई की तस्वीरें और पोस्टर लेकर चल रहे थे। कई लोगों की आंखों में आंसू थे, जबकि महिलाएं रोते हुए इस घटना पर अपना दुख और गुस्सा जाहिर कर रही थीं। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ जमकर नारेबाज़ी की और इस घटना को अन्यायपूर्ण बताया।

प्रदर्शन के दौरान एक शोकाकुल व्यक्ति ने कहा,
“उन्हें धोखे से मारा गया है, हम उनका गम मना रहे हैं। यह सिर्फ एक नेता की मौत नहीं, बल्कि पूरी उम्मत के लिए बड़ा नुकसान है।”
मार्च छोटा इमामबाड़ा से शुरू होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरा। इस दौरान सड़कों पर बड़ी संख्या में लोग शामिल होते गए और देखते ही देखते यह मार्च एक विशाल जनसमूह में बदल गया। प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया, लेकिन उनके चेहरे पर गहरा दुख और आक्रोश साफ दिखाई दे रहा था।
मौजूद मौलानाओं ने भी इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर और निंदनीय कार्रवाई बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं विश्व शांति के लिए खतरा हैं और इससे पूरी दुनिया में अस्थिरता बढ़ सकती है।
प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क रहा। सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था और पूरे मार्च के दौरान स्थिति पर नजर रखी गई। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत के बाद लखनऊ में इस तरह का जनसैलाब यह दिखाता है कि इस घटना का असर केवल Middle East तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में रहने वाले लोगों की भावनाओं से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। फिलहाल शहर में स्थिति सामान्य है, लेकिन शिया समुदाय में गहरा शोक और आक्रोश बना हुआ है।