
15 जनवरी को वाराणसी में जो हुआ, उसने एक पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया।
लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर की मूर्ति को खंडित किए जाने की घटना को पाल समाज ने केवल तोड़फोड़ नहीं, बल्कि सम्मान पर सीधा हमला बताया।
यह घटना चुपचाप दबने वाली नहीं थी—और ऐसा हुआ भी नहीं।
सड़कों पर उतरा गुस्सा, जेल में डाले गए युवा

मूर्ति खंडन के बाद पाल समाज के युवाओं ने विरोध दर्ज कराया। लेकिन जवाब में प्रशासन ने 18 युवाओं पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया।
समाज का आरोप है कि दोषियों तक पहुंचने के बजाय, आवाज उठाने वालों को दबाने की कोशिश की गई।
जेल से निकलते ही आंदोलन, प्रयागराज बना संघर्ष का केंद्र
जेल से रिहा होने के बाद युवाओं ने चुप बैठना मंज़ूर नहीं किया।
पाल समाज ने संगठित होकर प्रयागराज में एक बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया।
मांग साफ थी—
लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर की मूर्ति को सम्मान के साथ सही ढंग से पुनः स्थापित किया जाए।
“AI वीडियो” बयान और भड़का आक्रोश
इसी बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा घटना से जुड़े वीडियो को “एआई से बनाया गया” बताए जाने की बात सामने आई।
पाल समाज का कहना है कि इस बयान ने उनकी पीड़ा को और गहरा कर दिया।
समाज के लोगों को लगा कि
👉 उनकी भावनाओं को हल्के में लिया जा रहा है
👉 मुद्दे को टालने की कोशिश हो रही है
धरना, चेतावनी और 2027 का संदेश
इसके बाद धरनों का दौर शुरू हुआ। मंच से सख्त शब्दों में कहा गया कि
यह लड़ाई सम्मान की है, पहचान की है—और अगर ज़रूरत पड़ी तो इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाएगा।
पाल समाज के नेताओं ने साफ संकेत दिया कि
2027 के विधानसभा चुनाव में इस अपमान का जवाब वोट के ज़रिए दिया जाएगा।
सिर्फ मूर्ति नहीं, सवाल सम्मान का
यह विवाद अब सिर्फ एक मूर्ति तक सीमित नहीं रहा।
यह सवाल बन गया है—
- समाज के सम्मान का
- ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के आदर का
- और जनता की आवाज़ सुने जाने का
पाल समाज की मांग है कि
👉 मूर्ति की पुनः स्थापना हो
👉 दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो
👉 और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो