
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश।
बीते 18 फरवरी की रात लगभग तीन बजे थाना पुरामुफ्ती क्षेत्र के फतेहपुर घाट स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को कुछ अराजक तत्वों द्वारा खंडित कर दिए जाने की घटना सामने आई। जैसे ही यह खबर फैली, पूरे इलाके में आक्रोश और तनाव का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों के अनुसार यह केवल एक प्रतिमा पर हमला नहीं, बल्कि एक विचार और एक समाज की भावनाओं पर चोट है।
19 फरवरी को जब बहुजन समाज के लोग शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताने पहुंचे, तो हालात और बिगड़ गए। आरोप है कि विरोध दर्ज कराने वाले लगभग 40 लोगों – जिनमें युवा, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल थीं – के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दी गई। इनमें से पांच लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जब महिलाएं प्रतिमा की रक्षा के लिए आगे आईं, तब पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे। कई महिलाएं घायल हुईं और कुछ को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस कार्रवाई के बाद इलाके में भय का वातावरण है। फतेहपुर घाट के कई पुरुष घर छोड़कर बाहर रहने को मजबूर बताए जा रहे हैं।
स्थानीय दलित समुदाय का आरोप है कि मुख्य आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। कुछ लोगों का यह भी दावा है कि आरोपियों ने थाने में आर्थिक लेन-देन कर मामले को प्रभावित करने की कोशिश की है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
घटना के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित पक्ष का कहना है कि अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। कुछ लोगों ने यह आरोप भी लगाया है कि राजनीतिक समीकरणों के कारण कुछ बड़े नेता इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।
फिलहाल, पूरे क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और लोग न्याय की मांग कर रहे हैं। यह घटना केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव और संवेदनशीलता की भी परीक्षा है। अब देखना यह है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई कर पाते हैं या नहीं।